साकेत महाविद्यालय में पद्मभूषण परमपूज्य पं0 राम किंकर उपाध्याय की जयन्ती मनाई गई।
इस अवसर पर 'रामराज्य की अवधारणा' विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई जिसके मुख्य अतिथि डाॅ0 दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ रहे एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यसभा सदस्य राधाकान्त ओझा ने किया।

साकेत महाविद्यालय में पद्मभूषण परमपूज्य पं0 राम किंकर उपाध्याय की जयन्ती मनाई गई।
डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज
प्रतापगढ़, 1 नवम्बर।
इस अवसर पर ‘रामराज्य की अवधारणा’ विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई जिसके मुख्य अतिथि डाॅ0 दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ रहे एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यसभा सदस्य राधाकान्त ओझा ने किया।
सभी सम्मानित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।
कु0 श्रेया शुक्ला, कु0 गौरी सोनी, कु0 चाँदनी कु0 आस्था श्रीवास्तव द्वारा सरस्वती वन्दना और कु0 अंजली मिश्रा, कु0 रोशनी, कु0 आस्था, कु0 आरूषी, कु0 साक्षी द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से अतिथियों का स्वागत किया गया।
उ0प्र0 शासन के माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाॅ0 दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ जी ने इस अवसर पर बताया कि राम राज्य की परिकल्पना आज आदरणीय माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में मूर्त रूप ले रही है। यहाँ पर जाति, धर्म एवं समुदाय से ऊपर उठकर समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए प्रदेश के सभी साधन बराबरी से उपलब्ध है और सबका साथ, सबका विकास को चरित्रार्थ किया जा रहा है। ‘‘परित्रनारायण साधूनां, विनाशाय च दुष्कृताम्’’ माननीय मुख्यमंत्री जी का संकल्प है। अपराधियों को दण्ड देना और सद्कर्मियों के प्रति नमन करना सरकार का संकल्प है।
माननीय मंत्री जी ने छात्राओं द्वारा आयोजित स्र्टाटअप मेले का शुभारम्भ किया जिसमें 100 से अधिक स्टाॅल थे जिसमें वल्र्ड आॅफ वुमेन के बच्चों एवं महाविद्यालय की छात्राओं ने स्थानीय वनस्पतियों से औषधि और अपनी प्रतिभाओं का उपयोग कर धनोपार्जन की विद्या का प्रदर्शन किया।
नवनिर्वाचित सांसद माननीय श्री राधाकान्त ओझा जी का साकेत परिवार की तरफ से सम्मान किया गया और राम राज्य को मूर्त रूप में लाने के लिए उनसे आग्रह किया गया। श्री ओझा ने बालिका शिक्षा के प्रति पुनर्जागरण ट्रस्ट द्वारा किये जा रहे कार्य की सराहना की और छात्राओं को उ0प्र0शासन द्वारा दी जा रही सुरक्षा का और महिलाओं के वैधानिक अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की।
पद्मभूषण परमपूज्य पं0 राम किंकर उपाध्याय के प्रिय शिष्य परमपूज्य पं0 उमाशंकर शर्मा जी एवं परमपूज्य पं0 कृष्णकान्त द्विवेदी जी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
‘रामराज्य की अवधारणा’ विषय पर मुख्य वक्ता दैनिक हिन्दुस्तान के प्रबन्ध सम्पादक श्री प्रताप सोमवंशी जी एवं अन्य विशिष्ट वक्ताओं में डाॅ0 एस0के0 पाण्डेय, डाॅ0 वाचस्पति शुक्ला, डाॅ0 पीयूषकान्त शर्मा, प्रो0 मिथिलेश कुमार त्रिपाठी जी और महाविद्यालय के उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष श्री अजमत अली जी रहे।
वक्ताओं ने राम राज्य की परिकल्पना को रेखांकित करते हुए बताया कि इस राज्य की अवधारणा में शेर और बकरी एक साथ निर्भीक होकर रह सकते है और इसमें न कोई दुखी होगा और न कोई भूखा।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में पं0 उमाशंकर शर्मा जी के मानस प्रवचन को सुनने के लिए विशाल जनसमुदाय उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए पं0 उमाशंकर शर्मा जी एवं पं0 कृष्णकान्त द्विवेदी जी ने रामचरित मानस की आज के प्रसंग में वैज्ञानिक व्याख्या की और बताया कि राजकुमार राम से भगवान राम बनने के लिए स्वंय ईश्वर को भी वनगमन करना पड़ा और हम भी जब संघर्ष करते है तभी हमारा व्यक्तित्व निखर पाता है और किसी को परिवार के प्रति सर्मपण और त्याग की सीख लेनी है तो भगवान राम का अनुसरण करना पड़ेगा।
कार्यक्रम में आये हुये अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के संस्थपक श्री अरविन्द श्रीवास्तव जी ने अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर किया एवं आगन्तुकों के प्रति आभार बी0एड्0 विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ0 अवधेश कुमार शर्मा द्वारा किया गया।



